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हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड राज्य की सीमा को जोड़ने वाला यमुना नदी पर बने लगभग 5 दशक पुराना पुल खतरे की जद में है। बेलगाम खनन माफिया और सुस्त जिमेदार विभागों की लापरवाही पुल के अस्तित्व पर खतरा बन गई है। इस पुल पर पुल की क्षमता से अधिक भार वाले हजारों वाहन रोज गुजर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अधिक भार से पुल लगातार कमजोर हो रहा है ऐसे में पुल को कभी भी बड़ा नुकसान हो सकता है।
1970 के दशक में बने पुल के अस्तित्व पर खनन माफियाओं की मनमानी भारी पड़ रही है। भारी वाहन 16 चक्का 20 चक्का ओवरलोड भरे वाहनों के चलते खतरे में है।दोनों राज्यों की सीमाओं को जोड़ने वाले इस पुल का कुछ हिस्सा हिमाचल प्रदेश का है और कुछ हिस्सा उत्तराखंड राज्य का है लेकिन दोनों ही राज्य के शासन-प्रशासन में प्रतिनिधित्व करने वाले अपनी आंखें मूंदे बिल्कुल अनजान बने बैठे हैं। हिमाचल प्रदेश के राजस्व में एक अच्छी खासी आमदनी का हिस्सा इस पुल से जाता है शायद इसी लाभ के चलते इस पुल के ऊपर से गुजरने वाले लोगों का जीवन खतरे में डाला जा रहा है।अक्सर इस पाँवटा-कुल्हाल पुल पर जाम की स्थिति देखने को मिलती है ।पुल पर खड़े यात्री वाहन बराबर से गुजरने वाले वाहनों से पुल पर होने वाली कंपन से खुद को सहमा और डरा महसूस करते हैं लेकिन दोनों राज्यो के प्रशासन में बैठे अधिकारियों को आम जनमानस की जान की कोई परवाह ही नहीं है।पुल की इस दयनीय हालत को महसूस करते हुए सेवा निर्वित हुए इंजीनियर सुबोध अभी ने डीसी सिरमौर,एसपी सिरमौर और एसडीएम पाँवटा समेत कई संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में लेटर लिख चेताया भी था और उचित कार्यवाही करने के लिए भी कहा था साथ ही पुल की सुरक्षा को लेकर कुछ सुझाव भी इनके द्वारा दिए गए थे
जिससे भविष्य में जल्द होने वाली किसी बड़ी घटना को रोका जा सके जिनमें से मुख्य सुझाव टैक्स बैरियर ,एक्साइज टैक्सेशन को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए था जिससे पुल के ऊपर लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सके और भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया जाए साथ ही वाहनो की स्पीड लीमिट तय कर देनी चाहिए जैसे बस और हल्के लोडिंग वाहनो की स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटा , कार व बाइक की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए । कुछ समय पूर्व पीडब्लूडी और राष्ट्रीय राजमार्ग के विशेषज्ञों की टीम ने यह माना था कि पुल को अत्यधिक कंपन से रोकने के लिए भारी डंपर और ओवरलोड वाहनों का पुल पर प्रवेश वर्जित कर दिया जाना चाहिए। भविष्य में किसी होने वाली अप्रिय घटना से बचने के लिए रामपुर घाट पर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए एक पुल का निर्माण भी होना चाहिए, बावजूद इस सब के शासन प्रशासन की अनदेखी का आलम इतना है कि कोई भी इस मामले को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है।
उधर एक्सईएन एनएच वी के अग्रवाल ने बताया कि पुल की लगातार जांच की जाती है और रिपेयरिंग वर्क के लिए जल्द ही टेंडर आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल फुल को ऐसा कोई खतरा नहीं है।
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