News portals-सबकी खबर (शिमला ) विधान सभा में सुक्खू सरकार के बजट पर चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार में अधिकांश योजनाओं की घोषणाएं बिना पर्याप्त बजट प्रावधान के की गई हैं। पिछले तीन वर्षों की कोई भी योजना पूर्णतया लागू ही नहीं हो पाई। पिछले तीन सालों की बजट में घोषित दर्जनों योजनाएं ज़मीन पर नहीं उतर पाई है। इस बजट में प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं है। दुनिया में बजट का आकार हर साल बढ़ता है लेकिन सुक्खू सरकार का वर्तमान बजट तीन साल पहले के बराबर है। जो मुख्य क्षेत्र हैं उनके बजट में लगातार कटौती हो रही है। पिछले बजट वर्ष में 2024-25 की अपेक्षा मेजर सेक्टर में 2354 करोड़ रुपए यानी 21 प्रतिशत की कमी आई। अगले वित्त वर्ष में यह कटौती चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 3188 करोड़ रुपए यानी 41.77 फीसदी की कमी आई। इस तरह से प्रदेश का कैसे भला होगा? जब जन सुविधाओं के लिए बजट नहीं होगा तो लोगों को सुविधाएं कैसे मिलेगी?  पूंजीगत पिछले तीन सालों में लगातार गिरते हुए 3089 करोड़ यानी कि आधा हो गया। राजस्व घाटा लगातार बढ़ रहा है। पिछले चार बजट में राजस्व घाटा औसतन 10620 करोड़ रुपए रहा।

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। हमारी सरकार के समय कोविड जैसी महामारी के बाद भी सरकारी नौकरियों का ‘आल टाइम हाई रिकॉर्ड’ स्थापित हुआ। जब हम सत्ता में आए तो 1 लाख 77 हजार 338 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। 2022 में एक लाख 90 हज़ार 137 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। यानी  12749 सरकारी नौकरियां बढ़ी। वहीं व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार में पिछले 15 सालों में हिमाचल प्रदेश में नौकरियां सबसे नीचे चली गई हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025  में 1 लाख 75 हज़ार 579 नौकरियां हैं। तीन साल में कुल 15 हज़ार नौकरियां कम हो गई हैं। सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन में आंकड़े तो सरकार की पोल खोल रहे  हैं लेकिन मुख्यमंत्री झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार लगातार केंद्र सरकार को कोसती रहती है लेकिन पिछले तीन सालों में राजस्व प्राप्तियां में केंद्र की हिस्सेदारी क्रमशः 56%, 54% और 53.6% है।

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में हिस्सा, केंद्रीय अनुदान और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को मिलाकर पिछले छह सालों में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2026 तक क्रमश: 24990 करोड़, 22723 करोड़, 24315 करोड़, 23413 करोड़, 23050 करोड़, 21124 करोड़ रुपए मिले। आरडीजी बंद होने के बाद भी केंद्र के सहयोग में कोई खास कमी नहीं आई है। अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पिछले तीन सालों में क्रमशः लगभग 1500 करोड़, 2400 करोड़ और 3400 कुल 7300 करोड़ रुपए की मदद अलग से की है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार का यह बजट सिर्फ झूठ का पुलिंदा है, इसमें समय काटने और लोगों को बरगलाने से ज़्यादा कुछ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खेत बाड़ाबंदी योजना के लिए प्रस्तावित बजट केवल ₹10 करोड़ है, जबकि हमने ₹40 करोड़ का प्रावधान किया था। मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के भी बजट को कम कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी बीपीएल परिवारों को लाभ देने के बजाय केवल एक लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। इसके बावजूद 2026-27 में बिजली सब्सिडी का बजट घटाकर 1562 करोड़ से घटाकर 858 करोड़ रुपए कर दिया है जबकि 125 यूनिट फ्री योजना का लाभ लोगों को मिल नहीं रहा है। इसी तरह प्रमुख कार्यों का बजट 2026-27 में ₹2,624 करोड़ है।

उन्होंने बड़ा सवाल उठाया कि वेतन स्थगन की बात सरकार कैसे कर सकती है? संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत केवल वित्तीय आपातकाल की स्थिति में ही वेतन में कटौती की जा सकती है।

बजट 2026-27 में वेतन के लिए ₹14,721 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो वर्तमान वर्ष से मात्र 5 करोड़ रुपए अधिक है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई भत्ता देने की कोई मंशा नहीं है। पैरा 26 में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 में बिजली रॉयल्टी ₹2,500 करोड़ होगी लेकिन बजट में बिजली से प्राप्ति केवल ₹2,191 करोड़ दिखाई गई है, जो पिछले वर्ष से भी ₹8 करोड़ कम है। इसी तरह राज्य आबकारी से आय 2026-27 में ₹3,174 करोड़ अनुमानित है जो 2025-26 के ₹3,256 करोड़ से कम है। विकास केवल नादौन और देहरा क्षेत्रों तक सीमित है। यह बात सदन में विधान सभा अध्यक्ष महोदय भी कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल करते  हुए कहा कि आखिर मुख्यमंत्री सदन में बजट भाषण के में जो दावे कर रहे हैं, उनका साथ उनके द्वारा प्रस्तुत बजट के आंकड़े क्यों नहीं दे रहे हैं?

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